रदद् हो सकता है योगी सरकार का एक ही परिसर के प्राइमरी जूनियर के विलय का फैसला

38 हजार प्रधानाध्यापक की पोस्ट पूरे प्रदेश में एक ही झटके में समाप्त कर दी  गयी सरकार के द्वारा ठीक उसी तरह जिस तरह पुरानी पेंसन समाप्त की गई थी ।आज फिर वही गलती पुराने लोग कर रहे है कि मेरा क्या नुकसान है ,लेकिन नए अध्यापकों का सम्पूर्ण नुकसान हो रहा है प्रमोसन उनके लिए सपना हो जाएगा ।इतिहास आज फिर आपके चौखट पर अपने आपको दोहरा रहा है । क्या इसको भी चार पांच साल के बाद मुद्दा बनाकर राजनीति की रोटियां सेकी जाएंगी ?
प्रदेश के सारे संगठन के शूरमा क्यों मौन साध गए क्या एक ही तीर में सारे शूरमा चित हो गए किसी की भी इस मुद्दे पर आवाज नहीं निकल रही है ।
क्या अपना नेता जी वाला कुर्ता पैजामा और सदरी खूंटी पर टांग दिए । मित्रों समय रहते विरोध नहीं हुआ तो आने वाला इतिहास हमें माफ नहीं करेगा ।
ऐसे कम्पोजिट विद्यालय जहां मिडिल में सहायक अध्यापक इंचार्ज रहा हो और वह प्राइमरी के हेडमास्टर का जूनियर हो तो प्रशासक प्राइमरी का हेडमास्टर बनेगा।
RTE नियमों के तहत वह कक्षा एक से आठ तक का प्रशासक नहीं बन सकता है। क्योंकि वह मिडिल का TET उत्तीर्ण नहीं है। RTE एक्ट में प्राथमिक और मिडिल का अलग-अलग संवर्ग है और राज्य भी नियमावली के बीसवें संशोधन से RTE एक्ट के अनुपालन में अलग-अलग संवर्ग बना चुकी है।
इस तरह कम्पोजिट विद्यालय का प्लान बेसिक शिक्षा नियमावली का उलंघन है। सरकार अब नियमावली में यह संशोधन रद्द नहीं कर सकती है क्योंकि ऐसा करने पर RTE का उलंघन होगा। इसलिए लगभग 19 हजार पद जो हेडमास्टर के खत्म किये जा रहे हैं यह नियम विरुद्ध हैं और मामला न्यायालय में जाने पर सरकार की यह योजना रद्द हो सकती है।